भारत में विभिन्न प्रकार की जलवायु पाई जाती है जिससे वहां की वनस्पति एवं मिट्टी भी अलग-अलग होते हैं भारत के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग प्रकार की वनस्पति और अलग-अलग प्रकार की मिट्टियां पाई जाती है जिसमें मध्यप्रदेश में भी अलग-अलग प्रकार वनस्पति और अलग-अलग प्रकार की मिट्टियां पाई जाती है जिनमें से प्रमुख नाम नीचे दिए गए हैं
1. काली मिट्टी
2. लाल पीली मिट्टी
3. जलोढ़ मिट्टी
4. कछारी मिट्टी
5. मिश्रित मिट्टी
मध्य प्रदेश राज्य के अलग-अलग भागों में अलग-अलग प्रकार की मिट्टियां पाई जाती है मध्य प्रदेश में मुख्य रूप से ऊपर दी गई पांच प्रकार के कैटेगरी की मिट्टियां पाई जाती है इनको विस्तार से समझे
काली मिट्टी
1.काली मृदा को रेगुन एकम कपाशी मृदा आदि नामों से जाना जाता है
2. काली मिट्टी की जल धारण क्षमता सर्वाधिक होती है
3. इस मिट्टी में कपास की फसल प्रमुख रूप से उत्पादित की जाती है
4. काली मिट्टी की प्रकृति क्षारीय होती है
5. इस मृदा में लोहा एवं चुना प्रमुख रूप से पाया जाता है परंतु नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी होती है
6. इन मिट्टियों का निर्माण लावा द्वारा निर्मित बेसाल्ट चट्टान के अपक्षय से होता है
7. काली मृदा का काला रंग लोहे के ऑक्साइड मैग्नेटाइट के कारण होता है
जलोढ़ मिट्टी
1. इससे दोमट मिट्टी भी कहा जाता है जलोढ़ मिट्टी मुख्य रूप से नदियों के द्वारा लाई गई मिट्टी होती है यह मिट्टी मध्य प्रदेश के मध्य भारत के पठार में पाई जाती है जिसमें भिंड मुरैना शिवपुर ग्वालियर आदि जिलों में पाई जाती है
2. जलोढ़ मिट्टी की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं ››
1.1 यह मिट्टी उदासीन प्रकृति की होती है इसलिए इस मिट्टी में विभिन्न प्रकार की फसलें उत्पादित की जा सकती है
1.2 या मिट्टी सबसे ज्यादा उर्वरक होती है इस मिट्टी में गन्ने की फसल के साथ-साथ गेहूं चना सरसों आदि भी विशेष रूप से उगाया जा सकता है
लाल पीली मिट्टी
1. यह मिट्टी मध्य प्रदेश के पूर्वी भाग विशेष रूप से बघेलखंड का पठार में विस्तृत है जिसके अंतर्गत मंडला बालाघाट शहडोल जिले में यह मिट्टी प्रमुख रूप से पाई जाती है
इस मिट्टी की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है
1.1 लोहे के ऑक्साइड - फेरिक ऑक्साइड के कारण इसका लाल रंग होता है तथा जल मिलाने के कारण यह मिट्टी पीली दिखाई देती है ।
1.2 इन मिट्टी में लोहे की अधिकता होती है परंतु जैव पदार्थों एवं नाइट्रोजन की कमी होती है ।
1.3 लाल पीली मिट्टी मुख्य रूप से चावल की खेती के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी मानी जाती है इस मिट्टी की प्रकृति अम्लीय से क्षारीय तक होती है ।
मिश्रित मिट्टी
किस मिट्टी में डोरसा मिट्टी के नाम से भी पहुंचाना जा सकता है यह मिट्टी मध्यप्रदेश में मुख्यतः रीवा पन्ना के पठार तथा पूर्वी क्षेत्र बघेलखंड का पठार में भी इसके अंतर्गत आता है इस मिट्टी में लाल पीली काली आदि विधाओं का मिश्रण पाया जाता है ।
मोटे अनाज के लिए यह में काफी अच्छी मानी जाती है इस मिट्टी में नाइट्रोजन फास्फोरस एवं कार्बनिक पदार्थों की कमी पाई जाती है ।






