Type Here to Get Search Results !

संयुक्त राष्ट्र संघ में कागजी कार्रवाई के लिए हिंदी भाषा को मिली आधिकारिक मान्यता कई सालों से भारत कर रहा था प्रयास

 एक बार फिर रचा भारत में इतिहास लंबे समय से अटके संयुक्त राष्ट्र में हिंदी भाषा का प्रस्ताव पर सहमति बनी । दरअसल भारत में 2017 में संयुक्त राष्ट्र में कागजी कार्रवाई के लिए हिंदी भाषा को मान्यता देने के लिए एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया था जो 5 सालों बाद हिंदी भाषा को संयुक्त राष्ट्र की कागजी कार्रवाई में मान्यता मिली हिंदी भाषा के साथ बांग्ला और उर्दू भाषा को भी संयुक्त राष्ट्र की कागजी कार्रवाई में मान्यता मिली ।


संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में पहली बार हिंदी भाषा का उल्लेख अब मिलने जा रहा है प्रस्ताव में बहुभाषावाद पर संयुक्त राष्ट्र सचिवालय की जिम्मेदारी को रेखांकित किया गया है

संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा शुक्रवार को बहुभाषावाद पर पारित प्रस्ताव में पहली बार हिंदी भाषा को संयुक्त राष्ट्र की कार्रवाई में मान्यता मिल गई है यह एक भारत के लिए बहुत बड़ी कामयाबी है भारत में भी हिंदी भाषा को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि हिंदी भाषा के बिना संयुक्त राष्ट्र की प्रस्तावना अधूरी है

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत सहित अधिक से अधिक देशों द्वारा चौक प्रायोजित हिंदी भाषा को संयुक्त राष्ट्र की कागजी कार्रवाई के लिए स्वीकृति दी है यह प्रस्ताव छह आधिकारिक भाषाओं जैसे अरबी चीनी अंग्रेजी फ्रेंच रोसी और स्पेलिंग के अलावा गैर आधिकारिक भाषाओं का उपयोग करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों को मान्यता देता है और संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियां में बहुभाषावाद एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है इसी के प्रस्ताव में भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय भाषा हिंदी को अब संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा एक आधिकारिक भाषा के रूप में घोषणा कर दी गई इसमें एक 193 संसदीय संयुक्त राष्ट्र महासभा में अडोरा द्वारा प्रस्तुत किया गया ।

1 फरवरी 1946 को पहले सत्र में यू एन ए सी ने एक प्रस्ताव पास किया था यूएन ने कहा था संयुक्त राष्ट्र अपने उद्देश्यों को तब तक प्राप्त नहीं कर सकता जब तक दुनिया के लोगों को इसके उद्देश्यों और एक्टिविटीज के बारे में संपूर्ण जानकारी ना हो बहुभाषावाद पर भारत कई वर्षों से यूएन में हिंदी को मान्यता दिलाने का प्रयास कर रहा है जो अब जाकर पूरा हुआ

कैसे मिली हिंदी भाषा को मान्यता

संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी भाषा को मान्यता दिलाना इतना आसान नहीं है हिंदी भाषा को मान्यता दिलाने के लिए कई सालों से सरकार प्रयास कर रही है जो कि अब जाकर सरकार इस काम में सफल हुई है संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की संख्या 191 है संयुक्त राष्ट्र में हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने के लिए योग दिवस की तरह एक प्रस्ताव लाना होता है जो कि भारत सरकार संयुक्त राष्ट्र में लाइ थी । जिस पर 129 देशों की सहमति अनिवार्य होनी चाहिए यदि 129 देशों की सहमति नहीं हो तो संयुक्त राष्ट्र में किसी भी भाषा को आधिकारिक मान्यता नहीं मिल सकती यशोमती बन जाती है तो सरा के विधान की धारा 51 में संशोधन होगा और उसमें संयुक्त राष्ट्र की भाषा के रूप में हिंदी जुड़ जाएगी

हिंदी भाषा का महत्व

एक भाषा के रूप में हिंदी न सिर्फ भारत की पहचान है बल्कि यह हमारे जीवन मूल्यों और संस्कृति संस्कारों की एक धरोहर के रूप में है बहुत सरल और सहज तथा सुगम भाषा होने के साथ हिंदी विश्व में संभवत सबसे वैज्ञानिक भाषा है जिसे दुनिया भर में समझने और बोलने तथा चाहने वाले लोगों की बड़ी संख्या है हिंदी भाषा भारत के लगभग हर कोने में बोली जाती है हिंदी भाषा का ऐतिहासिक महत्त्व अभी बहुत ही यह बहुत सरल और सहज भाषा के रूप में जानी जाती है

संयुक्त राष्ट्र संघ क्या है

संयुक्त राष्ट्र संघ एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसक उद्देश्य सुविधाजनक बनाने में सहयोग और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा , आर्थिक विकास , सामाजिक प्रगति , मानव अधिकार और विश्व शांति के लिए कार्य करेगा यह  अंतरराष्ट्रीय कानूनों को संयुक्त राष्ट्रीय संघ की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को की गई थी इसके अधिकार पत्र पर 50 देशों ने हस्ताक्षर किए थे वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र संघ के 193 सदस्य  देश है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.