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भारत के सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना कब हुई इसमें जजों की नियुक्ति किस प्रकार की जाती है ; SUPREME COURT OF INDIA

 सुप्रीम कोर्ट भारत का सर्वोच्च न्यायालय है दिल्ली में स्थित है भारत का सुप्रीम कोर्ट जो भी कह देता है उस पर वह बाध्य रहता है सुप्रीम कोर्ट मैं 65 वर्ष की आयु तक ही जज कार्यरत रहते हैं सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रपति करते हैं सुप्रीम कोर्ट में 34 जज बैठते हैं सुप्रीम कोर्ट की स्थापना 26 जनवरी 1950 को की गई थी ।



सर्वोच्च या उच्चतम न्यायालय

अनुच्छेद 124 : इसमें भारत के सर्वोच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट के गठन की चर्चा की गई है 

सुप्रीम कोर्ट : 33+1 =34 जज बैठते हैं 

सुप्रीम कोर्ट का जज कैसे बने

सुप्रीम कोर्ट में जज बनने के लिए किसी हाईकोर्ट में 5 साल जजिया 10 साल वकील होना चाहिए साथ ही राष्ट्रपति के नजर में कानून का अच्छा जानकार होना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज तथा राष्ट्रपति नियुक्ति करते हैं

मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के समय राष्ट्रपति कोलोजियम से सलाह लेते हैं सुप्रीम कोर्ट के 5 सीनियर जजो कोलोजियम कहा जाता है ।

जजों को हटाने के लिए महाभियोग जैसी प्रक्रिया लाई जाती है अब तक किसी भी जज को महाभियोग के द्वारा नहीं हटाया गया सुप्रीम कोर्ट के जज रामास्वामी के विरुद्ध महाभियोग लाया गया था किंतु इसे पारित नहीं किया गया । सुप्रीम कोर्ट के जज 65 वर्ष तक ही कार्यरत रहते हैं इसके बाद अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को दे देते हैं

अनुच्छेद 125 : जजों का वेतन

जजों को संचित निति से वेतन दिया जाता है इसमें कटौती नहीं की जा सकती मुख्य न्यायाधीश को ₹280000 तथा अन्य न्यायाधीशों को ₹250000 दिया जाता है ।

अनुच्छेद 126

जब मुख्य न्यायधीश अनुपस्थित रहता है तो 33 जजों में से ही एक को अस्थाई मुख्य न्यायाधीश बना देते हैं जिसे कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश कहते हैं इस के वेतन भत्ते तथा शक्तियां मुख्य न्यायाधीश के बराबर ही रहते हैं क्योंकि यह अस्थाई रहता है

अनुच्छेद 127 : Ad - Hoc या तदर्थ न्यायधीश

इसका मुख्य अर्थ "इस उद्देश्य के लिए" .तदर्थ न्यायधीश को तब बुलाया जाता है जब सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या में कमी हो जाए । Ad - Hoc जज को लाने की सिफारिश CJI करते हैं इस सिफारिश के आधार पर राष्ट्रपति 25 H.c. के मुख्य न्यायाधीश से सलाह लेकर Ad - Hoc को नियुक्त करते हैं इसकी शक्ति सुप्रीम कोर्ट के बराबर होती है किंतु यहां अस्थाई होता है 

अनुच्छेद 128

जब ad - Hoc जज उपलब्ध नहीं हो तो सेवा निवृत जज को लाया जाता है

अनुच्छेद 129

सुप्रीम कोर्ट अभिलेख न्यायधीश का कार्य करती है अर्थात सुप्रीम कोर्ट का निर्णय किसी अन्य मुकदमे में भी उदाहरण के लिए प्रस्तुत किया जाता है ताकि न्याय जल्दी से मिल सके ।

अनुच्छेद 130 : सुप्रीम कोर्ट का स्थान

सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में है किंतु मुख्य न्यायाधीश के कहने पर राष्ट्रपति इसका खंडपीठ किसी अन्य शहर में खोल सकते हैं ।

अनुच्छेद 131 : सुप्रीम कोर्ट की प्रारंभिक या मूल अधिकारिता

इसके अंतर्गत ऐसे मामलों को रखते हैं जो सुप्रीम कोर्ट में ही सुलझाए जा सकते हैं इसमें तीन प्रकार के मुकदमे आते हैं

1. केंद्र और राज्य विवाद

2. राज्य और राज्य विवाद

3. एक और केंद्र और उसके साथ कुछ राज्य तथा दूसरी ओर कुछ अन्य राज्य

राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति का विवाद भी सीधे सुप्रीम कोर्ट जाता है किंतु मूल अधिकारिता में शामिल नहीं करते हैं क्योंकि इसकी चर्चा अनुच्छेद 71 में है 

अनुच्छेद 132

हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार

अनुच्छेद 137

सुप्रीम कोर्ट अपने ही फैसले को बदल सकती है उदाहरण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने चंपा कम दौराई राजन मामला सन 1960 का था तथा बेरुबारी मामला 1960 में प्रस्तावना को संविधान का अंग नहीं माना गया किंतु केशवानंद भारती मामला सन 1973 में सुप्रीम कोर्ट को न्यायिक पुनरावलोकन का प्रयोग करके अपने फैसले को बदल दिया और प्रस्तावना को संविधान का अंग मान लिया और कहा कि संसद इस में संशोधन कर सकती है साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मूल ढांचा का सिद्धांत दिया और कहा कि संसद ऐसा कोई परिवर्तन नहीं कर सकते जिससे कि संविधान का मूल ढांचा प्रभावित हो

इसी कारण आज अनुच्छेद केवल 395 ठीक है इसमें A,B,C,D करके जोड़ा गया है ।

अनुच्छेद 139

मूल अधिकार के अलावा किसी अन्य मामले में रीट निकालना हो तो सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 32 का प्रयोग न करके अनुच्छेद 139 का प्रयोग कर सकती है उदाहरण के लिए सरकारी मास्टर परमादेश रीट जारी करता है तो अनुच्छेद 32 के तहत होता है जबकि रेलवे के किसी कर्मचारी पर परम आदेश रिट जारी करता है तो अनुच्छेद 139 के तहत जारी होता है

अनुच्छेद 141

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भारत के सभी न्यायालय और सभी अधिकारी तथा सभी नागरिकों के लिए माध्य है यदि कोई व्यक्ति न्यायालय की बात को नहीं मानता है तो उसे अवमानना समझकर न्यायालय दंडित कर देता है ।

अनुच्छेद 143

राष्ट्रपति किसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह मांग सकते हैं लेकिन उस सलाह को मानने के लिए राष्ट्रपति बाध्य नहीं है इसी कारण सुप्रीम कोर्ट भी हर मुद्दे पर सलाह देने के लिए बाध्य नहीं है ।

1993 मैं राष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा मैं बावरी मस्जिद तथा राम जन्मभूमि मामले पर सलाह मांगा किंतु यहां लेने कोई सलाह नहीं दिया अर्थात सलाह देने से मना कर दिया ।

सुप्रीम कोर्ट सविधान का अंतिम व्याख्या करता है सुप्रीम कोर्ट एक निष्पक्ष तथा स्वायत संस्था है यह अपनी निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह अपने सभी नियुक्तियां स्वयं करती है ।

सुप्रीम कोर्ट के कर्मचारियों की पदोन्नति निलंबन तथा स्थानांतरण स्वयं सुप्रीम कोर्ट करती है ।

सुप्रीम कोर्ट के कर्मचारी तथा जजों का वेतन क संचिव

नीति से दिया जाता है जिसमें संसद कटौती नहीं कर सकती है

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