मानसून 2022 को लेकर आईएमडी का पहला अनुमान जारी देश भर में 90 से लेकर 104% बारिश होने की उम्मीद है जाने 2022 का मानसून कैसा रहेगा और कहां बरसेंगे बादल और कहां रहेगा सुखा इस बार मानसून सामान्य रहने का अनुमान है अभी के समय में समुंद्र में तापमान बढ़ रहा है जिस कारण मानसून बनना शुरू हो गया है मौसम विभाग के अनुसार पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान बताया गया है वही उत्तर पश्चिम भारत में भी कम बारिश की संभावना है मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली एजेंसी स्काईमेट के अनुसार भारत में 98 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान जताया गया है जिसमें 5 - 7% बदलाव भी संभव है वही एजेंसी का दावा है कि कुछ राज्यों में सामान्य से कम बारिश भी हो सकती है जैसे राजस्थान, गुजरात ,नागालैंड ,मिजोरम, मणिपुर, त्रिपुरा इन राज्यों में कम बारिश हो सकती है वही उत्तर भारत के राज्यों में जैसे उत्तर प्रदेश ,मध्य प्रदेश, पंजाब ,दिल्ली ,बिहार इन राज्यों में सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान इस साल एजेंसी ने लगाया है ।
भारतीय मौसम विभाग साल में दो बार मौसम की भविष्यवाणी करता है पहली भविष्यवाणी अप्रैल माह में तथा दूसरी जून माह में करता है यहा अनुमान स्काईमेट का है जो हर मौसम संबंधित गतिविधियों पर नजर रखती है जबकि सरकारी मौसम एजेंसी इस माह के अंत में अपना अनुमान जारी करेंगी ।
कैसे होंगे मानसून के 4 महीने >>
जून माह :-
1) 70 फ़ीसदी सामान्य बारिश का अनुमान
2) 20 फीसदी अत्यधिक बारिश का अनुमान है ।
3) 10 फीसदी कम बारिश का अनुमान है ।
जुलाई माह :-
1) 65% सामान्य बारिश का अनुमान है ।
2) 20 फ़ीसदी अत्यधिक बारिश का अनुमान है
3) 15 फ़ीसदी कम बारिश का अनुमान
अगस्त माह :-
1) अगस्त माह में 90% बारिश का अनुमान है
सितम्बर माह :-
1) 90 फिसदी बारिश का अनुमान है ।
2) 20 फ़ीसदी सामान्य बारिश का अनुमान है
3) 10% अत्यधिक बारिश का अनुमान है
4) 70 फ़ीसदी कम बारिश का अनुमान है
कब तक भारत में पहुंचेगा मानसून >>
भारत में सामान्य रुप से अप्रैल माह के अंत तक मानसून भारत में प्रवेश करता है और मई माह में मानसून केरल और महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में प्रवेश करता है इसके बाद वह 15 जून तक आधे भारत में मानसून फेल जाता है और 1 जुलाई तक यह मानसून पूरे भारत में फेल कर बारिश करता है
भारत में कैसे आता है मानसून >>
भारत में मानसून हिंद महासागर और पूर्व में बंगाल की खाड़ी और पश्चिम में अरब सागर से मानसून बनता है और यह मानसून भारत के दो ओर से भारत में प्रवेश करता है पहला यह पूर्व दिशा से तथा दक्षिण - पश्चिम दिशा से मानसून भारत में प्रवेश करता है मानसून की सबसे पहली बारिश केरल राज्य में होती है जब गर्मी के दिनों में धरातल की और गर्म हवा चलती है तो धरातल पर एक लो प्रेशर एरिया बनता है तथा समुंद्र में भी ऐसी हवाएं चलती है जिसके कारण समुंद्र में हाई प्रेशर एरिया बनता है और इसी कारण मानसून धरातल की ओर आगे बढ़ता है मानसून हमेशा हाई प्रेशर एरिया से लो प्रेशर एरिया की तरफ बढ़ता है ।
IMD की भविष्यवाणी >>
मौसम विभाग हर साल दो बार मानसून को लेकर भविष्यवाणी करता है यह भविष्यवाणी अप्रैल और जून माह में की जाती है पहली स्टेज में मौसम विभाग की ओर से पूरे देश में मानसून सीजन के दौरान होने वाली बारिश का पूर्वानुमान पेश किया जाता है जो कि जून माह से सितंबर माह का होता है ।
इस साल भी सामान्य रहेगा मानसून >>
देश में पिछले 3 सालों की तरह इस साल भी मॉनसून सामान्य रहने का अनुमान लगाया जा रहा है आईएमडी के अनुसार इस साल 90 फ़ीसदी बारिश की उम्मीद लगाई जा रही है वही एक तरफ क्षेत्रवार बारिश की जानकारी मई में दी जाएगी मौसम विभाग के मुताबिक जून में सबसे ज्यादा बारिश होने की संभावना है किसान के लिए यह खबर एक अच्छी खबर है क्योंकि शुरुआती महीनों में फसलों की बुवाई के लिए लिहाज से अच्छी बारिश होगी।
कहां सामान्य से कम बारिश का अनुमान है >>
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में इस साल कम बारिश होने का अनुमान लगाया जा रहा है इसके अलावा उत्तर - पश्चिम भारत के कुछ इलाकों में जैसे राजस्थान में भी कम बारिश होने का अनुमान है दक्षिण प्रायद्वीपीय के दक्षिणी हिस्सों में भी कम बारिश का अनुमान है ।
मानसून के साथ ही रहेगा 'ला नीना' >>
भारत में मौसम विभाग ने कहा है कि प्रशांत क्षेत्र में 'ला नीना' की स्थिति के कारण मानसून सामान्य रहने की संभावना है, साथ ही हिंद महासागर के ऊपर बनी आई ओ डी की स्थिति दक्षिण पश्चिम मानसून के मौसम की शुरुआत तक ऐसी ही रहने की संभावना है इसके बाद आएओडी की स्थिति नकारात्मक हो सकती है आईएमडी के अनुसार मई के अंत में मानसून के मौसम के लिए एक अपडेट अनुमान जारी करेगा ।
क्या है ला नीना >>
समुंद्र के तापमान के ठंडा होने को 'ला नीना' कहां जाता है आमतौर पर समझने के लिए इसे समुंद्री तापमान में बांटा जा सकता है इसके अलावा एक और 'अल नीनो' होता है यह बारिश को दबाने और कम करने में सहयोग करता है जबकि ला नीना बारिश को बढ़ाने मैं सहायता करता है आईओडी के तीन चरण तटस्थ नकारात्मक और सकारात्मक है । सकारात्मक स्थिति मानसून के लिए फायदेमंद होते हैं तथा नकारात्मक स्थिति मानसून के लिए खराब होती है ।


