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श्वसन तंत्र

 अंको का वैसा समूह जो सोशल की क्रिया में सहायक होता है उन्हें सामूहिक रूप से स्वसन तंत्र कहते हैं सोशल एक ऐसी क्रिया ही जिसमें ऑक्सीजन ग्रहण किया जाता है और कार्बन डाइऑक्साइड शरीर से निष्कासित किया जाता है जिसके परिणाम स्वरूप यह ऑक्सीजन ग्लूकोस को तोड़ देता है और CO2,H2Oतथा ऊर्जा निकलती है


शोषण की क्रिया ऑक्सीजन के क्रिया है इसके फलस्वरूप ऊर्जा निकलती है यही कारण है कि मृत व्यक्ति का शरीर ठंडा होता है क्योंकि वह सांस नहीं लेता है श्वसन की क्रिया एक अपचायी किया है

श्वासोच्छवास:- सांस अंदर लेने तथा बाहर छोड़ने की क्रिया को श्वासोच्छवास कहते  हैं यह दो प्रकार का होता है----------

                     1.निश्वसन

                      2. निःश्वसन

1.श्वसन:- सांस अंदर लेने की क्रिया को नि शोषण कहते हैं इसके द्वारा हम निम्नलिखित गैस लेते हैं ऑक्सीजन हम 21% लेते हैं नाइट्रोजन 78% जबकि सबसे कम कार्बन डाइऑक्साइड 0.03 प्रतिशत

2.निःश्वसन:- इसके अंतर्गत साथ अंदर लेने की क्रिया को निःशोषण कहते हैं इसके अंतर्गत हम निम्नलिखित रूप से गैस लेते हैं ऑक्सीजन 17% नाइट्रोजन 78% हम दोनों मे नाइट्रोजन समान मात्रा में लेते हैं जबकि कार्बन डाइऑक्साइड 4.6 प्रतिशत लेते हैं जितनी मात्रा में हम साथ अंदर लेते हैं उतनी ही मात्रा में हम सांस बाहर छोड़ते हैं किंतु गैसों का अनुपात बदल जाता है


     प्रमुख शोषण अंग

श्वसन तंत्र का वह अंग जो शोषण तंत्र में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है प्रमुख शोषण अंग कहलाता है

1.एक कोशिकीय जीव          -----  विसरण विधि

2.जलीय जीव                   -----क्लोम/गलफडा़

3.कीट।                            ----श्वासनली

4. टेडपोल(बच्चा मेढ़का का)---GILLS

5.निष्क्रिय मेढ़क(भुमि के अंदर)--त्वचा

6.बिन्छु।                                 ---बुकलंगस

7. मानव।                           --फेफडा़





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