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मनुष्य का कंकाल तंत्र

 कंकाल शरीर के आंतरिक अंगों की रक्षा करता है तथा जंतुओं को चलने फिरने में सहायता करता है यह शरीर को एक निश्चित आकार देता है कंकाल का मनुष्य शरीर में बहुत ही बड़ा योगदान है

1. बाह्य कंकाल

2. आंतरिक कंकाल


1. बाह्य कंकाल
बहुत शरीर के बाहर होता है शरीर की संपूर्ण अंगों को रक्षा प्रदान करता है जैसे केकड़ा मकड़ी चींटी गोगा मधुमक्खी बिच्छू सीपी आदि
नोट: कछुआ के आंतरिक तथा बा
दोनों कंकाल पाए जाते हैं इसके हाथ व पैर तथा शरीर में आंतरिक कंकाल तथा शेष शरीर बाय कंकाल का होता है
2. आंतरिक कंकाल- यह शरीर के अंदर मांसपेशियों के नीचे होता है यह शरीर के आंतरिक अंगों को रक्षा प्रदान करता है उदाहरण के लिए कुत्ता बिल्ली मानव सांप
# कंकाल तंत्र आज पेपर था उपास्थि से मिलकर बनता है

1. उपास्थि- यह मुलायम होता है क्योंकि इसमें केवल कैल्शियम फास्फेट पाया जाता है इनमें कैलशियम कार्बोनेट नहीं पाया जाता है यह नाक कान तथा सभी बड़ी हड्डियों के किस भाग में पाया जाता है

2.अस्थि- उपास्थि अत्यधिक कठोर होता है क्योंकि इसमें ch3 PS4 दो के साथ-साथ caco3 दोनों पाया जाता है बस्तियों में चोपन से 58% मी A3 बीएफ फोटो पाया जाता है

# हस्तियों में रक्त नलिका ए और तंत्रिका है तंत्र पाया जाता है

# हस्तियों में 50% जल और 50% कार्बनिक पदार्थ पाया जाता है

# 30 वर्ष की अवस्था में हड्डियों का घनत्व अधिक हो जाता है

# जन्म के समय हड्डियों की संख्या 270 से 310 के बीच होते हैं अर्थात जन्म के समय औसत हड्डियों की संख्या 300 होती है और बड़े होने पर यह मात्र 206 हड्डियां रह जाते हैं बाल्यावस्था में हड्डियों की संख्या 208 होती है मानव शरीर के समस्त अतिथियों को दो भागों में बांटा गया है


NOTE :-***अभी कार्य किया जा रहा है***

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